
कैसी भूमि धन लाभ देती है?
विषय:- किस प्रकार से जांचें उपयुक्त भूमि?
कैसे पता करें कि भूमि में वंश वृद्धि होगी?
भूमि का घनत्व –
भूमि का घनत्व जानने के दो मुख्य तरीके हैं:
[1] 1×1×1 फीट लंबाई, चौड़ाई और गहराई वाला खड्डा खोदें और उसकी मिट्टी को वापस भर दें। यदि खड्डा भरने के बाद कुछ मिट्टी शेष बच जाती है तो यह भूमि मकान बनाने के लिए बहुत बढ़िया रहती है। यदि मिट्टी वापस भरने पर समतल हो जाती है तो यह सामान्य भूमि होती है, इसमें बहुत अधिक लाभ नहीं होता है और हानि भी नहीं होती। यदि मिट्टी वापस डालने पर कम पड़ जाए तो यह अधिक धन व्यय करवाने वाली भूमि होती है तथा ऐसी भूमि पर मकान बनाने से बीमारियां अधिक होती हैं।
[2] 1.5×1.5×1.5 फीट गहरा खड्डा खोदें तथा शाम को उसे पानी से भर दें। अगले दिन सुबह वापस आकर देखें, यदि खड्डे में पानी रहता है तो यह मकान बनाने के लिए अच्छी भूमि मानी जाएगी, यह मजबूत भूमि होती है। यदि गीलापन रहता है लेकिन पानी सूख जाता है तो यह मध्यम भूमि है। लेकिन यदि दरारें पड़ जाएं, आसपास से मिट्टी गिर जाए तो यह भूमि मकान निर्माण के लिए अच्छी नहीं मानी जाती।
भूमि परीक्षण –
वास्तु शास्त्र में भवन निर्माण करने से पहले भूमि के परीक्षण के कुछ नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर हमें भविष्य में होने वाले नुकसानों से सुरक्षा मिलती है।
प्राकृतिक स्थिति –
प्राकृतिक स्थिति का अर्थ भूमि की बनावट और जल संसाधन आदि से है। अगर पूर्वोत्तर दिशा की तरफ सड़क या नदी, तालाब अथवा जल का कोई स्रोत हो और खुला स्थान हो तो घर बनाने के लिए यह जगह अच्छी रहती है।
शकुन शास्त्र –
जिस भूमि पर जाने से आपका मन प्रसन्न हो जाए, आत्मविश्वास बढ़े और अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिले, वह भूमि मकान बनाने के लिए अच्छी रहती है।
वनस्पति –
जिस भूमि पर सामान्य वृक्ष, घास, झाड़ आदि हों, वह भूमि सामान्य और शुभ मानी जाती है तथा उस पर मकान बनाना शुभ रहता है। इसके विपरीत जो भूमि रेतीली, बंजर, कंकड़-पत्थर वाली और उजाड़ हो, वह अशुभ मानी जाती है।
जहां फल-फूल के पौधे अधिक हों, वह भूमि सबसे अच्छी मानी जाती है। ऐसी भूमि पर मकान बनाने से हमेशा धन और वंश की वृद्धि होती है।
उर्वर क्षमता –
जिस भूमि पर मकान बनाना हो, उस भूमि पर मूंग, सरसों, तिल, गेहूं आदि के बीज बो दें। यदि 3 दिन में अंकुर आ जाएं तो यह भूमि श्रेष्ठ मानी जाएगी। इस पर मकान बनाने से संपत्ति लाभ होता है तथा कुल में वृद्धि होती है।
यदि 5 दिन में अंकुर आते हैं तो यह भूमि मध्यम मानी जाएगी। यदि 7 दिन के बाद अंकुर आएं या अंकुर ना आएं तो यह भूमि अशुभ मानी जाएगी।
इस परीक्षण को करते समय मौसम का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि बरसात के समय इस प्रकार के परीक्षण करेंगे तो पानी की अधिकता से बीज सड़ जाएंगे।
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