भूमि

तिकोने, टेढ़ेमेढ़े भूखंड हानिकारक होते हैं।

विषय:- वर्गाकार और आयताकार भूखंड विशेष शुभ होते हैं।

भूखंड बिगड़ा हो तो वास्तु के नियमानुसार सुधारना आवश्यक है।

एस्ट्रोलॉजर निखिल कुमार

के उद्देश्य से किया जा रहा हो, ऐसी भूमि पर मकान बनाने से बचना चाहिए। जिस भूमि पर बिल्लियां लड़ती हों, गीदड़ आदि रोते हों, कौवे अधिक बैठते हों या उल्लू अथवा कौवे के पंख गिरे हुए मिलते हों, ऐसी भूमि पर मकान आदि नहीं बनाने चाहिए।

जिस भूमि में जंगली जानवर रात में आते रहते हों या आसपास गहरे खड्डे हों, तो उसे पर भी मकान नहीं बनना चाहिए। जिस भूमि में उपजाऊपन ना हो वह भूमि भी शुभ नहीं होती है।

भूमि में दरारें पड़ी हों या चूहों के बिल अधिक हों वहां पर भी भवन निर्माण नहीं करना चाहिए। लेकिन जहां हरी घास उगी हो, आसपास फलदार पौधे हों तथा जमीन पर दूर्वा और कुश की घास हो, वह भूमि शुभ मानी जाती है।

भूमि के आकार प्रकार और लक्षण

[1] आकृति –
यदि भूमि की आकृति त्रिभुजाकार, विषमबाहु या अंडाकार या सर्पिल आकार हो, वह भूमि किसी भी प्रकार के भवन निर्माण के लिए हानिकारक होती है।

लेकिन इसके विपरीत वर्गाकार, आयताकार या ध्वजाकार भूमि को खरीदना चाहिए क्योंकि उसे शुभ माना जाता है। जिस भूमि को खरीदने से ही धन हानि शुरू हो जाए, वह भूमि अशुभ होती है।

ऐसी भूमि पर धनहानि, वंशहानि, धन व्यर्थ जाना, विवाद की परिस्थितियां बनना, किसी न किसी को रोग लगना आदि समस्याएं आती रहती हैं।

यदि मजबूरी में ऐसी भूमि खरीदनी पड़े तो उसके आसपास पेड़-पौधे लगाकर, वास्तु के अनुसार सुधार करना चाहिए। खड्डे आदि बंद कर दें तथा बिगड़े आकार को वर्गाकार या आयताकार बनाने का प्रयास करना चाहिए।

मकान का निर्माण कभी भी 6 कोणों के 8 कोणों के आकार में नहीं करना चाहिए।

[2] लक्षण –
जिस भूमि पर बिजली गिरी हो, पहले भेड़-बकरियों का बाड़ा रहा हो या ऐसे पशु जिनका पालन मांस आदि के लिए किया जाता हो, ऐसी भूमि पर भवन निर्माण नहीं करना चाहिए।

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