सुविचार –
मन और बुद्धि जब विकट परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में असमर्थ लगने लगे तो ईश्वर का नाम लेकर परिस्थिति को स्वीकार कर जीवन चलने देना चाहिए।

पूजा स्थान की ऊर्जा
आपके भाव पूजा स्थान की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं।
विषय:- पूजा करते समय छोटी गलतियां बड़ी नकारात्मकता को जन्म देती है।
जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
किसी का स्वभाव सरल है, व्यक्ति शरीफ है तो वह महाकाली, बालामुखी या तारा की पूजा अधिक समय तक नहीं कर पाएगा क्योंकि व्यक्ति में उस प्रकार की ऊर्जा झेलने की क्षमता नहीं होगी। उसे पूजा स्थान में इरिटेशन होने लगेगी।
कुछ लोग श्रीकृष्ण या श्रीराम की भक्ति की उम्मीद नहीं रख सकते और श्रीराम मंत्र से अलग स्तोत्रों का पाठ करने को कहें तो नहीं झेल पाएंगे।
मेरे एक मित्र हैं जो श्रीराम भक्त हैं, उन्होंने आजमाने के लिए एक अलग स्तोत्र का पाठ किया लेकिन 2-3 बार करने के बाद उन्हें अच्छा अनुभव नहीं हुआ, कुछ अनुभव के बाद वह स्तोत्र छोड़ने पर मजबूर हो गए।
आपको अगर अपने पूजा स्थान में ऐसा नकारात्मक सा अनुभव होता है तो आप सबसे पहले अपने पूजा विधि को देखें कि उसमें गलती तो नहीं है।
जैसे कि शिवजी को तुलसी नहीं चढ़ती, लेकिन लोग आंगन में पौधा देखकर पता तोड़ के चढ़ा देते हैं। इससे शिवजी रुष्ट होते हैं। ऐसी छोटी गलतियां बहुत से लोग करते हैं।
अपने पूजा स्थान की ऊर्जा चेक करने के कुछ पॉइंट्स ये हैं:
[1] दीपक ज्यादा देर तक नहीं जलता, जल्दी ही बुझ जाता है, ये नकारात्मक ऊर्जा की अधिकता है।
[2] अच्छी क्वालिटी के तेल का दीपक जलाने के बाद भी तेल जल्दी खत्म हो जाए, खुशबू के बदले बदबू आए या धुआं अधिक छोड़े — ये नकारात्मक ऊर्जा का चिन्ह है।
[3] पूजा करते ही मन दुखी या भारी होने लगे, इसका मतलब देवी-देवता की ऊर्जा आपकी ऊर्जा से बैलेंस नहीं कर रही।
[4] पूजा पाठ करने में ऐसा महसूस होना जैसे जबरदस्ती पूजा करवा रहे हों — ये भी ऊर्जा का सही मेल नहीं दर्शाता।
अगर आप सकारात्मक ऊर्जा चेक करनी है तो एक एक्सपेरिमेंट करें:
अपने पूजा स्थान में और अन्य कमरे में गेंदा का 1-1 फूल रखें, जहां तापमान आदि बराबर हो।
जिस स्थान का फूल पहले सूखता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा अधिक प्रभावी होगी।
जिस स्थान का फूल अधिक समय तक ताजा रहे (7-8 दिन), वहां की ऊर्जा सकारात्मक मानी जाएगी।
अपने पूजा स्थान की ऊर्जा के साथ-साथ अपने ईष्ट के साथ बॉन्डिंग भी चेक करें।
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