
विषय:- सही होते हुए भी कानून काम क्यों नहीं आता है?
शनिदेव न्याय के देवता हैं, लेकिन सरल कानून का आपके प्रति दुरुपयोग हो जाता है जिसे आप रोक नहीं पाते।
शनिदेव को ज्योतिष में न्याय के देवता कहा गया है। कानून और न्याय शनिदेव के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। शनिदेव की एक टांग टूटी है इसलिए वे धीरे चलते हैं और न्याय व्यवस्था भी इसी कारण धीरे चलती है।
अक्सर पीड़ित लोग कानून को कोसते हैं क्योंकि न्याय प्रक्रिया इतनी धीमी होती है कि इंसान अंदर से टूट जाता है। अत्यधिक जघन्य अपराध के मामलों में स्पीडी ट्रायल किया जाता है लेकिन उस स्पीडी ट्रायल में भी कई साल लगते हैं, या स्पीडी ट्रायल भी स्लो मोशन जैसा फील देने लगता है।
लोग कानून का दुरुपयोग करते हैं जिसमें आम आदमी पीसा जाता है।
जैसे कि हत्यारा ही कानून का दुरुपयोग कर लेता है, नार्को टेस्ट के लिए इंकार कर देता है। नार्को टेस्ट से सच्चाई सामने आ सकती है लेकिन कानून कहता है कि बिना व्यक्ति की अनुमति के कोई उसके शरीर का बाल भी नहीं उखाड़ सकता है, तो फिर सोडियम पेन्टोथल जैसा केमिकल अपने शरीर में इंजेक्ट करने की अनुमति अपराधी क्यों दे जो उसे अपराधी साबित कर सकता है।
और यदि मान लीजिए कि जबरदस्ती नार्को टेस्ट कर दिया तो भी संविधान कहता है कि कोई व्यक्ति स्वयं के खिलाफ गवाही नहीं दे सकता। इस तरह से कानून का दुरुपयोग होता है जिसका खामियाजा पीड़ित व्यक्ति को उठाना पड़ता है।
क्या इस कारण से पीड़ित को इतना घाटा उठाना पड़ता है?
क्या शनिदेव जानबूझकर कानून को आपके खिलाफ कर देते हैं?
पहला तथ्य पूर्वजन्म का है कि यदि आपने किसी के साथ अन्याय किया था तो इस जन्म में शनिदेव आपको दंड देंगे और उसी कानून का दुरुपयोग आपके खिलाफ होगा।
एक सरल सा कानून आपके सहयोग का होता है जो किसी निश्चित काल के लिए आपके जीवन की सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।
कानून में आरक्षण को देखें तो किसी के लिए वह वरदान है और किसी के लिए अभिशाप है। कानून व्यवस्था ही शत्रु बन जाती है। लेकिन जिसे आरक्षण का लाभ मिलता है वही व्यक्ति जब जज बन जाता है तो कानून से ही कमाता है।
वह कभी इस बात को नहीं सोचेगा कि आरक्षण उसके लिए श्राप है। ये सब पूर्वजन्म में कानून के दुरुपयोग का फल होता है कि इस जन्म में कानून आपके लिए ऐसी सजा बन जाता है कि आप हिरासत या जेल में नहीं होते लेकिन आपकी जिंदगी भी जेल जैसी लगती है।
दूसरा तथ्य रावण और शनिदेव की कहानी का है। रावण को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। रावण ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके शनिदेव को अपने पैरों के नीचे दबाकर रखा था।
उसकी तुलना हम आज के भ्रष्ट लोगों से कर सकते हैं जो कि कानून को अपने पैरों तले दबाकर दूसरों को पीड़ित करते हैं। इस तथ्य में अंतर केवल इतना है कि उस समय रावण जैसा एक व्यक्ति था, आज ऐसे अनेक लोग हैं जो शनिदेव को अपने पैरों तले दबाने की मानसिकता रखते हैं।
लेकिन एक समय ऐसा भी आया कि हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के पैरों के नीचे से आजाद कर दिया तथा उसके बाद रावण की लंका जल गई और उसके अंत की शुरुआत हो गई।
आज के समय में यदि किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो वह अपने पूर्वजन्म का पाप भुगत रहा है या दूसरा उसे परेशान कर के स्वयं पाप कमा रहा है।
शनिदेव एक निष्पक्ष देवता हैं जिन्हें किसी से न अपनापन है न किसी से दुश्मनी। किसी के साथ कानूनी अन्याय हो रहा हो तो उपरोक्त दोनों तथ्यों में से कोई एक तथ्य उस पर लागू समझें और न्याय के लिए प्रयास करें।
कानून अंधा होता है लेकिन अंधों के लिए अंधा नहीं होता है। यदि आपको अन्याय हो रहा है तो अंततः भगवान आपको फल जरूर देंगे क्योंकि आप अन्याय को अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं, दूसरे को स्वयं के साथ अन्याय करने की अनुमति दे चुके होते हैं।
कानून संबंधित समस्या जब भी हो तो शनिदेव के साथ हनुमान जी की पूजा जरूर करें।
ज्योतिष सूत्रों के आधार पर शनिदेव और हनुमान जी शत्रु हैं लेकिन हनुमान जी शनिदेव की मदद करते हैं और शनिदेव की मकर राशि में मंगल उच्च हो जाता है। मंगल के देवता हनुमान हैं और मकर के स्वामी शनिदेव।
हनुमान जी के गुरु सूर्यदेव के पुत्र शनि हैं, इसलिए अपने गुरु के पुत्र की मदद हनुमान जी करते हैं।
कानून व्यवस्था से पीड़ित होने पर हनुमान जी और शनिदेव की पूजा जरूर करें।
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