मृत्यु

यमराज के नाम से अधिकतर लोगों को डर ही लगता है, लेकिन अंत में उनके पास ही जाना है।


सुविचार

कर्म ही साथ जाता है।

विषय:- मृत्यु अकाट्य सत्य है।

धन संपत्ति आये या ना आये, लेकिन मृत्यु आनी ही है।
इसलिए स्वयं को तैयार रखना आवश्यक है।

मृत्यु इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। पैदा हुए हैं तो मरना ही है।
सभी जानते हैं कि सबने मरना है। कुछ आजमाई हुई बातें आपके सामने लिख रहा हूँ जिससे आपको अपनी मृत्यु के समय का पता चल जायेगा।

बहुत से लोगों के बारे में आपने सुना होगा कि उन्हें मरने से पहले अपने फैल होने के कारण मौत आने का समय पता हो गया था।
यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। उन सब तक भी कोई न कोई रास्ता था।

संकेत (लक्षण)

[1] आपको अगर अपना नाक दिखाई देना बंद हो जाए तो 6 महीने में मृत्यु समझें।
[2] प्रत्यक्ष तारामंडल के बीच वाला तारा दिखना बंद हो जाये तो 6 महीने में मृत्यु समझें।
[3] जीभ निकालने पर जीभ ना दिखे तो 6 महीने में मृत्यु समझें।
[4] आँखों के संचालन में तकलीफ और धुंधला लगना लगे तो 6 महीने में मृत्यु समझें।
[5] शीशा देखने पर अपना चेहरा टेढ़ा-मेढ़ा या विकृत दिखने लगे तो 6 महीने में मृत्यु समझें।
[6] पानी या तेल में परछाई देखने पर उसमें छेद या दरार दिखने लगे तो 6 महीने में मृत्यु समझें।
[7] हाथ-पैर का संचालन बिगड़ने लगे और भोजन की मात्रा कम होने लगे तो 6 महीने में मृत्यु समझें।
[8] अपने मृत बुजुर्ग बार-बार नजर आने लगें या उनका एहसास होने लगे तो 3 महीने में मृत्यु समझें।
[9] नाक की दाईं या बाईं छिद्र में से कोई एक बिना बीमारी के लगातार 8-9 घंटे चलती रहे तो 3 महीने में मृत्यु समझें।
[10] अपनी परछाई अपने से दूर भागती हुई महसूस हो तो 3 महीने में मृत्यु समझें।
[11] किसी रोगी का मल-मूत्र छूट जाये और बैठना असमर्थ हो तो 7 दिन में मृत्यु समझें।
[12] चलते-चलते शरीर पर स्वयं लाल दाग पड़ने लगें तो 7-10 दिन में मृत्यु समझें।
[13] हृदय और नाड़ी की गति कभी तेज और कभी मंद चले तो 5 दिन में मृत्यु समझें।
[14] रोगी के चेहरे का मांस ढीला और लटकता हुआ लगे तथा चेहरा पीला पड़े तो 5 दिन में मृत्यु समझें।
[15] रोगी के हाथ-पैर काम करना बंद कर दें और पैरों में सूजन आये तो 5 दिन में मृत्यु समझें।
[16] रोगी के गले से घरघराहट की आवाज आने लगे और खांसी बढ़ जाये तो 3-7 दिन में मृत्यु समझें।
[17] रोगी के मुंह से सिर्फ “मां”, “हूं”, “आमा”, “अम्मा” जैसे शब्द निकलें तो 3 दिन में मृत्यु समझें।
[18] रोगी अगर जल बिल्कुल ही त्याग दे तो 2 दिन में मृत्यु समझें।
[19] दोनों कान बंद करने पर अगर एक कान की आवाज बंद हो जाये तो बड़ी विपत्ति का संकेत है। दोनों कानों की आवाज बंद हो जाये तो 3 दिन बाद मृत्यु निश्चित समझें।

इन लक्षणों में विज्ञान अधिक है। शरीर से संबंधित इसमें जीव विज्ञान है।

शरीर का जब भी कोई हिस्सा सही और सुचारु रूप से काम नहीं करता तो इसका मतलब यह होता है कि शरीर खराब हो रहा है और मृत्यु की तरफ जा रहा है।

आंखें सही तरीके से नहीं देख रही, दिमाग तक सही प्रतिविंब नहीं पहुंच रहा, नाक सही तरीके से काम नहीं कर रही, कान सही तरीके से काम नहीं कर रहे, पेट सही काम नहीं कर रहा, किडनी खराब हो रही है तो यह संकेत हैं कि शरीर धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।

मृत्यु के लिए अपने मन और बुद्धि को तैयार करना चाहिए क्योंकि एक दिन सबको मरना है।
किसी को अपनी मौत का डर नहीं होना चाहिए।

हमारी मर्जी से मृत्यु नहीं होती, मृत्यु भगवान की मर्जी से होती है।
जीवन देना और लेना उसी के हाथ में है।

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