श्रीमुख योग

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लग्न में बृहस्पति, दशम में सूर्य और नवम में शुक्र हो और तीनों ग्रह शुभ प्रभाव में हों, सम या मित्र अथवा उच्च राशि में हों तो श्रीमुख योग बनता है।

ऐसा जातक बहुत कामयाबी हासिल करता है और समाज में उच्च प्रतिष्ठित होता है।
कम समय में बड़ी सफलता पाने की योग्यता रहती है।

प्रस्तुत कुण्डली में श्रीमुख योग बना है।

जातक पीएचडी होल्डर है और सरकारी जॉब करता है।
अनेक कलाओं में निपुण है, गुणवान व्यक्ति कहा जा सकता है।

जन्म विवरण

जन्म - 3 मई 1979
समय - 12:26 बजे
स्थान - अलीगंज

कुण्डली के प्रमुख बिंदु

1. लग्न का प्रभाव

लग्न में उच्च बृहस्पति के कारण हंस महापुरुष राजयोग बना है।
बृहस्पति के साथ चन्द्रमा होने से गजकेसरी योग बना है।
बृहस्पति दिग्बली भी है, जिसके कारण शुभता और अधिक बढ़ गई है।

2. दशम भाव का प्रभाव

दशम स्थान में उच्च राशि का सूर्य है।
सूर्य भी दिग्बली है तथा 18° का मजबूत सूर्य है।

इससे अच्छे स्तर की सरकारी जॉब का योग बनता है तथा सरकार से धन लाभ की संभावना रहती है।

3. नवम भाव का प्रभाव

नवम भाव में उच्च शुक्र के कारण मालव्य महापुरुष राजयोग बना है।

नीच बुध के साथ शुक्र होने से
नीचभंग राजयोग तथा लक्ष्मी नारायण राजयोग बन रहे हैं।

जातक का जीवन उच्च स्तर का है तथा लेखन और संगीत कला में भी निपुणता प्राप्त है।

4. नवम भाव की ग्रह स्थिति

नवम भाव में बुध, शुक्र और मंगल की उपस्थिति जातक को
धार्मिक, प्रतिभाशाली और विद्वान बनाती है।

5. भाग्य और शुभता

भाग्य स्थान में उच्च का शुक्र और लक्ष्मी नारायण योग,
और उस पर उच्च भाग्येश की दृष्टि

ऐसी स्थिति बनाती है कि इसकी शुभता का पूर्ण वर्णन करना भी कठिन हो जाता है।

6. द्वितीय भाव का दोष

द्वितीय भाव में शनि और राहु का प्रेतश्राप योग है।

इसके कारण
जातक उच्च स्तर की जॉब और गुणों के बावजूद
प्रसिद्धि पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर पाता

द्वितीय भाव हमारी वाणी, प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति का सूचक होता है,
जहाँ शनि और राहु कुछ हानि पहुँचा रहे हैं।

7. धन और व्यवहार

ये सभी शुभ ग्रह जातक को महत्वाकांक्षी बनाते हैं,
लेकिन द्वितीय भाव का शनि-राहु प्रभाव

दिखावे के कारण धन व्यय करवाता है
या किसी न किसी रूप में अनावश्यक खर्च और नुकसान करवाता है

8. स्वास्थ्य संकेत और सावधानी

लग्न में बृहस्पति वाले जातक को मांस, मदिरा और धूम्रपान से दूर रहना चाहिए।

यदि वर्तमान संक्रमण राहु अंतर्दशा का संकेत है
तो भविष्य में गले से संबंधित किसी गंभीर रोग की संभावना बन सकती है।

9. विशेष ज्योतिषीय समानता

कर्क लग्न की इस कुण्डली में
बृहस्पति उच्च, गजकेसरी योग, सूर्य और शुक्र उच्च

यह विशेष स्थिति दर्शाती है कि ऐसे चार प्रमुख ग्रहों की समान स्थिति
भगवान श्री राम जी की कुण्डली में भी विद्यमान थी।

यह कुण्डली दर्शाती है कि जब शुभ ग्रह उच्च स्थिति में होकर राजयोग बनाते हैं, तो जीवन में असाधारण सफलता, ज्ञान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। किन्तु साथ ही, छोटे दोष भी जीवन के कुछ क्षेत्रों में संतुलन बिगाड़ सकते हैं, इसलिए सजगता और संयम अत्यंत आवश्यक है।