
वास्तुशास्त्र में दिशा का महत्व
पूर्व दिशा में होती है सकारात्मक ऊर्जा।
विषय:- जानें किस दिशा में है कैसी ऊर्जा।
किस दिशा में क्या होना शुभ है।
पित वर्ण अर्थात पीले वर्ण वाली दिशा कहा गया है और पूर्व दिशा में लाल अथवा पीले रंग के पर्दे शुभ माने जाते हैं। यदि मकान का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर हो तो यह मकान के लिए एक शुभ संकेत होता है। इससे मकान में सुख समृद्धि आती है तथा ऐसे घर में रहने वाले लोग हमेशा महत्वाकांक्षी बने रहते हैं। इसका कारण पूर्व दिशा से सूर्य देव की आने वाली रोशनी और ऊर्जा है। पूर्व दिशा में सूर्य एवं चंद्रमा उदय होते हैं जो कि निरंतर प्रगति का प्रतीक है और साथ ही हमें यह भी ज्ञान देते हैं कि जिसका उदय हुआ है उसका अस्त भी होगा और जो आज पूरा है कल वह अधूरा भी होगा और जो अधूरा है वह एक दिन पूरा भी होगा। जीवन में समय सदा एक सा नहीं रहेगा। लेकिन जिस तरह से सूर्य रोज उदय होता है इस तरह व्यक्ति को जीवन में हार जीत या अस्त हो जाने के निराशा ना रखें, हमेशा सूर्य की तरह उदय होने वाला बनना चाहिए।
पूर्व दिशा में सावधानियां –
पूर्व दिशा में भारी सामान नहीं रखना चाहिए। व्यर्थ की वस्तुएं जैसे कचड़ा आदि नहीं रखना चाहिए। जितना संभव हो सके पूर्व दिशा की तरफ स्थान बढ़ाना चाहिए। यदि पूर्व दिशा की तरफ स्थान कम होता है तो यह एक तरीके से इस दिशा के देवता का अपमान करने जैसा है। यदि इस दिशा में शौचालय आदि बनाए तो वह जीवन में उन्नति के पथ पर बाधाएं उत्पन्न होने का कारण बनता है। एक ही घर में वास्तु स्थान समतल या हल्की सी ढलान वाला होना चाहिए। पूर्व दिशा के स्थान को ऊंचा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सूर्य की आने वाली रोशनी को रोकते हैं और धन हानि का कारण बनते हैं। पूर्व दिशा में बहुत ऊंचे पेड़ नहीं होने चाहिए जिनकी छाया घर पर पड़े। यह भी अपने आप में नकारात्मक प्रभाव देते हैं और मन में उदासी भर देते हैं। नकारात्मक प्रभाव होता है। दाल में नमक जितना अधिक और तनाव जैसी परिस्थितियां इनके कारण जन्म-नकारात्मक प्रभाव एवं आम बात है इसका हमें ख्याल रखना चाहिए।
नजरअंदाज कर सकते हैं, लेकिन यदि नकारात्मक प्रभाव अधिक है तो इसे समय रहते दूर करना चाहिए। वास्तु के नियमों का हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमारे सकारात्मक बल बढ़ता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। दिन के समय पूर्व दिशा की खिड़कियां खुली रखें ताकि सूर्य की किरणें कमरे में प्रवेश करके नकारात्मकता समाप्त करें।
पूर्व दिशा –
पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा है। पूर्व दिशा में सूर्यदेव तथा चंद्रदेव उदय होते हैं। वैसे तो सूर्य देव को लाल रंग अति प्रिय है लेकिन वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा को सभी रंगों के लिए शुभ माना जाता है क्योंकि सूर्य की लालिमा सभी रंगों को अपने अंदर समाहित करती है। जब कभी किसी भी भवन का निर्माण चाहिए जो कि सूर्य की रोशनी कमरों में आने दे इससे करना हो तो उसे समय वास्तु के नियमों का हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि हमें सकारात्मक परिणाम मिले।
बड़े स्तर पर हुआ तो वह हमारे जीवन को प्रभावित करते पूर्व दिशा में क्या हो – पूर्व दिशा में जितना संभव हो सके नुकसान कर सकता है। इस नकारात्मक प्रभाव को कम स्थान साफ रखना चाहिए, भूमि समतल होनी चाहिए और करने के लिए विश्वकर्मा जी ने कुछ ऐसे उपाय बताए हैं जो यदि घर का कोई दरवाजा पूर्व दिशा की तरफ नहीं है तो बिना किसी तोड़फोड़ किए हमारी समस्याओं को कमरों की खिड़कियां पूर्व दिशा की तरफ अवश्य होनी चाहिए। इन उपायों को अपनाकर आप पूर्व दिशा की सकारात्मक ऊर्जा का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्व दिशा में सुधार करके अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता ला सकते हैं। यह छोटे-छोटे उपाय बड़े परिवर्तन ला सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष:
वास्तु शास्त्र केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाने का एक व्यावहारिक विज्ञान है। पूर्व दिशा की ऊर्जा को सही तरीके से अपनाने से हम अपने घर और जीवन में खुशहाली और प्रगति ला सकते हैं। इसलिए, वास्तु के नियमों को समझें और अपने दैनिक जीवन में इनका पालन करें।
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