
वास्तुशास्त्र में दिशा का महत्व
किस दिशा में होती है सकारात्मक ऊर्जा।
विषय:- जानें किस दिशा में है कैसी ऊर्जा।
किस दिशा में क्या होना शुभ है।
ईशान कोण –
इस कोण में भगवान शिव का आधिपत्य है। भगवान शिव को कल्याण और अभय के देवता माना गया है। ईशान कोण पूर्व तथा उत्तर दिशा के बीच का कोण है। इसमें इन्द्र को कुबेर की शक्ति का समन्वय है, जो कि धन, संतान और वंश वृद्धि को बढ़ाता है। भगवान शिव को जल की धारा बहुत प्रिय है, इसलिए इस दिशा में पानी के स्रोत रखना चाहिए तथा पानी की निकासी भी इस दिशा में ही जानी चाहिए।
यह दिशा हल्की होनी चाहिए। इस दिशा में सफेद रंग शुभ माना गया है। पूजा के समय पूर्व दिशा या उत्तर दिशा अथवा ईशान कोण की तरफ मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।
वास्तु में दिशाओं का महत्व
उत्तर दिशा –
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा कहा गया है और कुबेर जी को धन के अधिष्ठाता भी कहा गया है। उत्तर दिशा के घर का भाग अधिकतर खुला रहना चाहिए ताकि उत्तर दिशा की सकारात्मक तरंगें घर में प्रवेश कर सकें।
इस दिशा के भाग को ऊंचा नहीं करना चाहिए तथा कोई ऐसा स्थान भी नहीं बनाना चाहिए जो ऊंचा हो। धन समृद्धि के लिए इस दिशा को खाली रखना उचित रहता है। इस दिशा की तरफ सिर करके नहीं सोना चाहिए।
उत्तरी ध्रुव की चुंबकीय तरंगें मानव रक्त को सिर की तरफ ले जाती हैं, जो कि ब्रेन हेमरेज जैसी समस्या पैदा कर सकती हैं और मस्तिष्क संबंधित रोग दे सकती हैं। इस दिशा की तरफ सिर करके सोने से कंगाली आती है।
इसी दिशा में कैलाश पर्वत भी है इसलिए इसे भगवान शंकर की दिशा भी माना जाता है। इस दिशा में सफेद अथवा हरे रंग के पर्दे लाभ देते हैं।
अंतरिक्ष (ब्रह्मा जी) –
पूर्व दिशा तथा ईशान कोण के बीच वाला भाग वास्तु में अंतरिक्ष कहा गया है। यह सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी का स्थान माना गया है।
घर के दरवाजे, मंदिर आदि इस दिशा में हों तो विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। इस दिशा में यदि घर का मंदिर अथवा पूजा स्थान बनाएं तो वहां पूजा करने से लाभ प्राप्त होता है।
वंश वृद्धि तथा धन प्राप्ति के लिए इस स्थान को साफ और शुद्ध रखना चाहिए। इस दिशा में पीले रंग के पर्दे होना शुभ माना गया है।
पाताल (अनंत) –
यह पश्चिम तथा नैऋत्य कोण के बीच का स्थान माना गया है। यह अनंत नामक नाग अर्थात शेषनाग का स्थान है।
इस दिशा में भारी सामान रखना चाहिए, लेकिन खिड़की और दरवाजे इस दिशा में रखना अशुभ माना गया है।
नकारात्मक ऊर्जा इस दिशा में घर में प्रवेश करके लड़ाई-झगड़े तथा रोगों का कारण बनती है।
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